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सहरसा में BPSC अभ्यर्थी पिटाई मामला: दरोगा शिल्पी कुमारी निलंबित, जांच तेज, पुलिस महकमे में हड़कंप

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सहरसा में BPSC अभ्यर्थी की कथित पिटाई मामले में बड़ा एक्शन हुआ है। बलवाहाट थाना की दरोगा शिल्पी कुमारी को निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच जारी है।

सहरसा/आलम की खबर:सहरसा जिले में बीपीएससी अभ्यर्थी के साथ कथित मारपीट के मामले ने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। इस गंभीर आरोप के बाद बलवाहाट थाना में पदस्थापित दरोगा शिल्पी कुमारी को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई सामने आने के बाद पूरे जिले में चर्चा का माहौल है और पुलिस विभाग के भीतर भी इस मामले को लेकर हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।

जानकारी के अनुसार, बीपीएससी की तैयारी कर रहे एक छात्र को किसी मामले में पूछताछ के लिए बलवाहाट थाना लाया गया था। आरोप है कि थाना परिसर में उसके साथ कथित रूप से बेरहमी से मारपीट की गई, जिससे छात्र की हालत बिगड़ गई। घटना की जानकारी जैसे ही बाहर आई, यह मामला तेजी से फैल गया और स्थानीय लोगों के बीच आक्रोश बढ़ने लगा। परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।

मामला तूल पकड़ने के बाद सहरसा पुलिस अधीक्षक हिमांशु ने तुरंत संज्ञान लिया और प्रारंभिक जांच के आदेश दिए। जांच में प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए संबंधित दरोगा शिल्पी कुमारी को निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद पुलिस प्रशासन ने साफ किया है कि मामले की गहराई से जांच की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हिरासत में किसी छात्र के साथ इस तरह का व्यवहार हुआ है तो यह बेहद गंभीर मामला है। लोगों ने मांग की है कि केवल निलंबन ही नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि अन्य पुलिसकर्मी भी इसमें शामिल पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसी द्वारा ही यदि इस तरह का व्यवहार होगा तो आम जनता का भरोसा प्रभावित होगा।

इस घटना को लेकर छात्र संगठनों और BPSC अभ्यर्थियों में भी नाराजगी देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है, जहां छात्र न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि पुलिस को संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए, खासकर उन युवाओं के साथ जो भविष्य निर्माण की तैयारी कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, पुलिस विभाग अब पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहा है। थाना परिसर में मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। साथ ही पीड़ित छात्र और उसके परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि घटना की वास्तविकता स्पष्ट हो सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल सहरसा पुलिस प्रशासन इस मामले को लेकर सतर्क है ताकि कानून व्यवस्था पर कोई असर न पड़े। वहीं दूसरी ओर आम जनता और छात्र वर्ग की निगाहें अब जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यह मामला एक बार फिर पुलिस व्यवहार, हिरासत में सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।

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